55 वर्षों की शान्तिपूर्ण साधना का संघर्ष इतिहास
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर का गिरिपार क्षेत्र हाटी समुदाय की कुल चौदह उप-जातियों का मूल निवास स्थान है जिसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1299 वर्ग किलोमीटर है I सम्पूर्ण गिरीपार की 154 ग्राम पंचायतों के मूल वाशिन्दें हाटी शिमला संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सिरमौर जिले की चार विधान सभाओं में अपना प्रभावशाली अस्तित्व चिरकाल से बनाए हुए हैं I जिले की पांच विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में से केवल शिलाई विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र सम्पूर्ण रूप से हाटी जनजाति क्षेत्र है लेकिन शिमला, सोलन, नाहन, पांवटा साहिब और चंडीगढ़ में भी हाटियों की दमदार उपस्थिति हैं I
हाटी जनजाति की कुल जनसंख्या तीन लाख से अधिक है I जिला कल्याण अधिकारी के जनसँख्या सर्वेक्षण रिपोर्ट 1998 के अनुसार गिरिपार की कुल जनसँख्या में खोश-कनैत-मियां 47.07%, भाट/ब्राह्मण/पाबुच 16.07%, देवा 2.29% और डेटि 2.03% हैं I 1970 के दशक से आरम्भ हुआ शांतिपूर्ण हाटी जनजाति आन्दोलन अपने सफ़र में कई उत्तार चढ़ाव को पार करता हुआ 4 अगस्त, 2023 को केन्द्रीय विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति उपरान्त सफलता के परवान चढ़ा हैं I
हाटी जनजातीय आन्दोलन की अलख जगाने में 1967ई० की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी जौनसार-बाबर के मूल निवासी जौंसारा को भारत सरकार द्वारा जनजाति के रूप में अधिसूचित करना I चूँकि जौनसार-बाबर और गिरीपार सिरमौर प्राचीन समय से समरूप भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, धार्मिक और नृवंशीय (एथ्नोग्राफिक) पृष्ठ भूमि से बंधे हैं और प्राचीन काल से 1833 ई० तक एक ही रियासत के अभिन्न अंग थे; इसलिए गिरीपार सिरमौर के हटियों को अपना अधिकार मांगना आज भी ज़ायज और तर्क संगत लगा I अपने वांछित उदेश्य की पूर्ति और लम्बे संघर्ष की डगर तय करने हेतु 1983 में गठित केंद्रीय हाटी समिति ने स्वयं को सभायें पंजीकरण अधिनियम XXI, 1860 के तहत सितम्बर, 1985 में पंजीकृत करवाया I
सिरमौर गज्ज़ेटीयर 1904, 1934 व 1969, कवंर रंजौर सिंह की तारीख-ए-रियासत सिरमौर 1911, डी० एन० मजूमदार की Himalayan Polyandry 1960, हिमाचल निर्माता डॉ० वाई० एस० परमार की Polyandry in Himalayas 1975, डॉ० रूप कुमार शर्मा कृत सिरमौर दर्पण 1991, प्रसिद्ध लेखक पवन बक्शी की गिरिपार सिरमौर का हाटी समुदाय 2011 आदि मूल स्वीकृत स्त्रोत हैं जिनमें गिरिपार सिरमौर और जौनसार-बाबर की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक-सांस्कृतिक व एथ्नोग्राफिक समरूपता को उजागर किया जा चुका हैं I
इन दोनों क्षेत्रों में एक जैसे रीति-रिवाज, एक जैसे मेले-त्यौहार, एक जैसे ब्यंज्जन-पकवान, एक जैसी आस्था व धार्मिक मान्यताएं, एक जैसे विश्वास-अंधविश्वास विद्यमान हैं I सिरमौर का चूड्धार व जौनसार-बाबर का हनोल आज भी दोनों के मध्य धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं I दोनों समुदायों के मध्य रोटी और बेटी का रिश्ता आज भी कायम है I दोनों तरफ के दर्जनों गाँव आज भी एक ही पूर्वज के वंशज मानते हैं जिसकी पुष्टि निम्न उदाहरणों से होती है :
| गिरीपार सिरमौर (हाटी) | जौनसार-बावर (जौंसारा) | सयुंक्त वंशज |
|---|---|---|
| द्राबिल | गबेला | गोब्दोऊ |
| शिलाई | मेन्डोली | ठेंडेऊ |
| ढाढस कुफर | टिम्बरा | सेवोग |
| मुईनल बाग़ | शराड़ी | छंगाण |
| मोहराड | मलेता | गुलदार |
| बाली | जगोली | जोगौऊ |
| माशू | हाष्टा | मसवाणे |
| कोटि बौंच | रावणा | सिंगटोऊ |
| शरली | शिमोंग | भर्तियेऊ |
| कमरौली | खाम्ब्रौली | कमरऊ |
| झकांडो | झाबराड़ | झोकटेयाल |
*यह सूची हाटी और जौंसारा समुदायों के बीच के गहरे ऐतिहासिक और वंशावली संबंधों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
प्रशासनिक प्रयास एवं समितियों की रिपोर्ट
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातीय आयोग द्वारा तत्कालीन हि० प्र० विधान सभा अध्यक्ष व आयोग के सदस्य श्री टी० एस० नेगी के नेतृत्व में गठित समिति से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा I आयोग ने श्री टी० एस० नेगी समिति द्वारा प्रेषित रिपोर्ट को स्वीकृत करते हुए 1979 ई० में केंद्र सरकार को हाटियों की मांग पूरा करने की अनुशंसा की थी जिससे हाटी जनजातीय आंदोलन को और भी बल मिला I
केंद्र सरकार ने 1980 ई० में हाटियों की धरातलीय वास्तविकता पुनः जानने के उद्देश्य हेतु निदेशक हि० प्र० राज्य कल्याण आयोग को पत्र लिखा जिसके प्रतिउत्तर में तत्कालीन उपायुक्त सिरमौर ने गिरीपार-जौनसार की समरूपता व लोकुर आयोग की अनुशंसा अनुरूप ही पुष्ट व विस्तृत तथ्य प्रस्तुत किये थे I केंद्र सरकार की मांग अनुरूप प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शांता कुमार ने याचिका समिति के सभापति कन्हैया लाल की अध्यक्षता में वर्ष 1992 में सात सदस्यी समिति गठित की जिसने गिरिपार सिरमौर के विभिन्न स्थानों के भ्रमण उपरान्त 5 दिसम्बर, 1992 को रिपोर्ट सदन के पटल पर प्रस्तुत करते हुए हाटियों की माग को उचित ठहराया और अनुशंसा की थी I
1996 ई० में आयुक्त एवं सचिव कल्याण मंत्रालय हिमाचल सरकार ने डॉ० एस० के० गुप्ता के नेतृत्व में छः सदस्यी समिति का गठन किया गया जिसके द्वारा प्रेषित 'Social Assessment Study of District Sirmour: A Report' के आधार पर हाटियों की मांग को उचित पाते हुए सरकार से स्वीकृत करने की अनुशंसा की गई I शिमला संसदीय क्षेत्र के सभी सांसद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हाटियों की मांग को निरन्तर संसद में उठाते रहे हैं I वर्ष 2002 ई० में तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने सदन में गिरिपार सिरमौर के हाटियों को जनजातीय दर्जा प्रदान करने हेतु सरकार के संकल्प को दोहराया था I
वर्ष 2010 ई० में आयुक्त एवं प्रधान सचिव जनजातीय मंत्रालय हिमाचल सरकार ने उपायुक्त सिरमौर को हाटी समुदाय के अंतर्गत आने वाली 14 उप-जातियों का जनसँख्या विवरण और जातिगत सर्वेक्षण सौंपे थे जिसमें एथनिक सजातीयता को पुष्ट किया गया था I वर्ष 2011 ई० में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने प्रदेश सरकार को विशेषज्ञता प्राप्त सक्षम एजेंसी के माध्यम से विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौपने को कहा और सर्वेक्षण हेतु पाँच लाख रूपये की राशि भी जारी की थी I
तत्कालीन प्रदेश मुख्यमंत्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन संस्थान को सोशियो-इकनोमिक एवं एथ्नोग्राफिक पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिकृत किया I जब केंद्रीय हाटी समिति का प्रतिनिधी मंडल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह जी से मिला तो उन्होंने जनजातीय अध्ययन संस्थान को बीस दिन के अन्दर रिपोर्ट सौपने के आदेश दिए I संस्थान ने हाटियों के दावों को उचित मानते हुए सकारात्मक रिपोर्ट सौंपी I यदपि इस प्रतिवेदन में राजगढ़ क्षेत्र की 19 पंचायतों को अयोग्य बताया था लेकिन प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने सम्पूर्ण गिरिपार क्षेत्र के हाटियों को जनजाति घोषित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित करके केंद्र सरकार को भेजा I
पाठकों की जानकारी हेतु यह उल्लेखित किया जाना अतियाव्श्यक कि सिरमौर जिले की अति पिछड़ी घोषित 25 पंचायतों में से 23 पंचायतें गिरिपार सिरमौर में ही अवस्थित हैं I
राजनितिक इच्छाशक्ति एवं सामाजिक प्रभाव
राजनितिक इच्छा व सहयोग के परिपेक्ष में देखा जाए तो केंद्र में देश के दो प्रमुख राजनितिक दलों के प्रधानमंत्रियों के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया I 1980 के पश्चात शिमला संसदीय क्षेत्र के सभी सांसदों के अतिरिक्त मंडी संसदीय क्षेत्र के तत्कालीन सांसद श्री महेश्वर सिंह, हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के तत्कालीन सांसद व हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री प्रेम कुमार धूमल ने 1998 में लोक सभा में इस मुद्दे को उठाया था I केंद्रीय हाटी समिति ने राजनितिक प्रमुखों के साथ मिलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह के समक्ष भी अपनी उपयुक्त व उचित मांग के समर्थन में शिष्ट मंडल भेजा था I
शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे श्री वीरेंद्र कश्यप द्वारा वर्ष 2011 से 2019 के मध्य हाटी को उनका अधिकार दिलाने के लिए अपनी प्रतिवद्धता अनुरूप हर स्तर पर उल्लेखनीय प्रयास किये I श्री वीरेंद्र कश्यप जी ने सांसद रहते हाटियो की जायज़ मांग को पूरा करने हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, तत्कालीन गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्रि श्री जगत प्रकाश नड्डा व जनजातीय मंत्री श्री ज़ोएल ओराँव के समक्ष हाटियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलकर केंद्र सरकार व भारतीय जनता पार्टी की प्रतिबद्धता से अवगत करवाया था I मई 2018 को केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने हरिपुर धार के बिशु मेले में हाटियों की मांग को पूरा करने और सहयोग देने के लिए मंच से आश्वस्त किया था I
आज हाटी समुदाय सोशल मीडिया में भी विभिन्न सांस्कृतिक विडियो से धूम मचा रहा है I हाटी कबीला, हाटी एक्रोस द ग्लोब, गिरिपार की आवाज, हाटी की गूंज, हाटी सांस्कृतिक मंच, जैसे कई सोशल नेटवर्किंग समूह हैं जिनको सांस्कृतिक रूचि की तरफ मोड़ने में सिर्फ और सिर्फ हाटी जनजातीय आन्दोलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है I सिरमौर के क्षेत्र में स्थित राजकीय महाविद्यालय संगडाह, शिलाई, कफोटा, आँज-भोज, नाहन, राजगढ़, ददाहू, सराहं, पांवटा साहिब में हाटी छात्रों के अनुरोध पर कई हाटी लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं I
अपनी आवाज़ को बुलंद करने और समृद्ध व विशिष्ट संस्कृति को संरक्षित करने के ऊदेश्य से केंद्रीय हाटी समिति ने अपनी वेबसाइट https://haatitribegiripar.in/ को भी 2018 में शुरू किया है जिसे हाटी जनजाति दर्जा प्राप्त होने पर अब https://hatteegiripar.in के नाम से प्रोन्नत किया गया है I
हाटी समुदाय: शोध एवं शैक्षणिक आयाम
हाटी जनजातीय आन्दोलन का चौथा महत्वपूर्ण आयाम रहा है - गिरिपार सिरमौर के हाटियों को शोध के केंद्र में लाना I आज हिमाचल प्रदेश विश्व-विद्यालय शिमला, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, केंद्रीय विश्व विद्यालय धर्मशाला व पंजाब विश्व विद्यालय चण्डीगढ़ के विभिन्न विभागों के अंतर्गत शोधार्थी गिरिपार के हाटियों की विशिष्ट लोक संस्कृति, बारीक अनाज उत्पादन, अद्भुत सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताएं, हाटी लोक गायन, देवपूजन परम्पराएं, बहुपत्ति प्रथा, रीत-खीत प्रथा, बेगार-बैठू प्रथा, सामाजिक-एथ्नोग्रफिक संरचना, गिरिपार के मेले-त्यौहार, गिरिपार के पारम्परिक खाद्य ब्यँजन आदि कई ऐसे बिषय हैं जिन पर शोध हुआ है तथा आगे भी गहनता से जारी रहने की बहुत गुंजाइश हैं I
हिमाचल प्रदेश विश्व विद्यालय के विभिन्न विभागों के अंतर्गत गिरिपार सिरमौर के हाटियों पर शोध करने वालों में:
- शोधार्थी श्री के० एस० नेगी द्वारा "Socio-Economic Aspects of Bethu System in Sirmour District: A case Study of Trans Giri Tract Of Sirmour" (1986)
- डॉ० रमेश कुमार द्वारा "Integration of HAATIS in the main stream of Indian Society: A Case Study of Trans Giri Area of District Sirmour" (2009)
- अनिल कुमार द्वारा "Socio-Cultural aspects of Giripaar Sirmour: A Case Study" (2010)
- सुमन शर्मा द्वारा "शिलाई तहसील की लोक गायन संस्कृति" (2015)
- सुरेश कुमार द्वारा "Demand for the Tribal Status: A Case Study of the Haati community of Sirmour District in HP" (2019)
- पंजाब विश्व विद्यालय चंडीगढ़ के शोधार्थी डॉ० अरुण भारद्वाज द्वारा "An Ethnographic Study of the Haati Community of District Sirmour" (2019)
- केंद्रीय विश्व विद्यालय धर्मशाला के शोधार्थी विनोद कुमार द्वारा "हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में हाटी समुदाय" (2020)
- कृषि विश्वविद्यालय के शोधार्थी डॉ० शालिनी द्वारा "गिरिपार सिरमौर के बारीक अनाज उत्पादन" (2019)
हिमाचल प्रदेश भाषा, साहित्य एवं कला अकादमी शिमला द्वारा भी हाटी-जौनसारी सामाजिक-सांस्कृतिक समरूपता पर दोनों क्षेत्रों के विद्वानों की संगोष्ठियाँ व कार्यशालाओं का आयोजन जाखाना तथा पांवटा-साहिब में किया जा चुका हैं जिसमें उत्तराखंड जौनसार-बाबर के इतिहास के प्रकांड विद्वान एवं शोधार्थी श्री टीका राम शाह ने सहर्ष पुष्ट किया कि जौनसार बाबर और गिरिपार सिरमौर का आर्थिक, भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व एथ्नोग्राफिक इतिहास एक ही पृष्ठ भूमि से उपजा हैं और आज भी दोनों क्षेत्रों के लोगों में रोटी–बेटी का अटूट सम्बन्ध है I दोनों क्षेत्र के दर्जनों गाँव आज भी रिश्तों के डोर में सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों को साँझा करते हैं I
मीडिया कवरेज, डॉक्यूमेंट्री एवं सांगठनिक ढांचा
गिरिपार सिरमौर के हाटियों की विषम भौगोलिक परस्थितियों, विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं पर कई डॉक्यूमेंट्री बन चुकी है जिसमें जी० ई० ई० न्यूज़ व बी० बी० सी० न्यूज़ चैनल में गिरिपार सिरमौर की बहुपति प्रथा पर प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री उल्लेखनीय हैं I बोलीवुड क्षेत्र मुम्बई के प्रसिद्द निर्माता व निदेशक श्री विवेक तिवारी जी द्वारा निर्मित एवं निर्देशित होने वाली फिल्म "Haati: We Exist" का प्रोमो वर्ष 2019 में पांवटा साहिब में लॉन्च किया था और आज यह कोलकता के Open International Film Challenge में श्रेष्ठ documentory चुनी गयी. Paris EDIPLAY Film Festival में Best Feature Narrative Movie चुनी गई है I
30 अगस्त 2021 को इसे हिमाचल पदेश के ऊना जिले में आयोजित International Film Festival (KARUKIT) में Best Documentary Feature Film पुरस्कार प्राप्त हुआ है I मुम्बई इंडी में बेस्ट documentary, दुबई ओपेरा फेस्टिवल और चीन के गंगझाऊ अन्तराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने के लिए चयनित हुई हैं. राजगढ़ के श्री मेलाराम शर्मा द्वारा वर्ष 2019 में निर्मित व निर्देशित पारम्परिक उत्सव बूढी दिवाली को नोएडा में सम्पन्न लेक सिटी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में देश की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंटरी फिल्म के पुरस्कार से नवाज़ा गया I
न्यू यॉर्क शहर से हिमाचल दिवस पर प्रदर्शित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हाटी संस्कृति को प्रमुखता से पेश करते हुए केंद्रीय हाटी समिति के वर्तमान महा सचिव श्री कुंदन शास्त्री से हाटी की विशिष्ट सांस्कृतिक धरोहर पर वार्तालाप भी की I हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष व राष्ट्रीय स्तर के स्तंभकार श्री के० एस० तोमर ने हाटी जनजातीय आन्दोलन के समर्थन में "The Tribune व् Hindustan Times" के संपादकीय पृष्ठ पर लेख प्रकाशित किये हैं I इसके अतिरिक्त अमर उज्जाला, दिव्य हिमाचल, पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों में इस आन्दोलन पर कई समाचार व लेख प्रकाशित हो चुके है I
हाटी आन्दोलन निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयुक्त एवं उचित प्रयोग करते हुए सभी राजनितिक दलों के साथ समन्वयन स्थापित किये हुए हैं और विशेष रणनीति के तहत केंद्रीय हाटी समिति के तत्वाधान में गिरिपार सिरमौर के सभी विकास खंडो, तहसिलों, उप-तहसीलों और पंचायतों में इकाइयां गठित होने के पश्चात् अब ग्राम स्तर पर हाटी इकाइयां गठित की गई हैं I इसके अतिरिक्त त्वरित कार्यवाही हेतु नाहन, सोलन, शिमला, चंडीगढ़ तथा दिल्ली में क्षेत्रीय इकाइयां गठित हुई है जिसमें सबसे अधिक सक्रिय भूमिका युवाओं की रही है I
वर्तमान दशा, दिशा एवं निर्णायक नेतृत्व
वर्तमान में हाटी जनजातीय आन्दोलन की दशा व दिशा के सन्दर्भ में बात करने पर केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डॉ० अमीचंद कमल व महा सचिव श्री कुंदन शास्त्री जी के कुशल नेतृत्व व आप सभी की सक्रिय भागीदारी से हाटी आन्दोलन जन आन्दोलन का रूप धारण कर चुका है I
वर्ष 2013 और वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट में हमारी मांग को प्रमुखता दी थी, चूँकि हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी श्री जय राम ठाकुर के नेतृत्व में सरकार गठित करने के उपरान्त विजन डॉक्यूमेंट को सरकार का नीतिगत दस्तावेज़ अपना चुके थे और केंद्र सरकार के गृह मंत्री श्री अमित शाह के समक्ष हाटी की उचित मांग की पैरवी भी कर चुके थे I
हिमाचल प्रदेश से राज्य सभा सांसद श्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपनी राजनितिक कुशलता का परिचय देते हुए भारतीय जनता पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट में उल्लेखित हाटी समुदाय की दशकों लंबित पड़ी मांग को निरंतर सदन में उठाकर इस मुद्दे को संजीवनी प्रदान की I शिमला संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद श्री सुरेश कश्यप द्वारा वर्ष 2020 में संसद का शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे को पुनः सरकार के ध्यानार्थ में लाया I
हाल ही में केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग ठाकुर के हिमाचल दौरे के दौरान हमारी क्षेत्रीय हाटी इकाई चंडीगढ़, सोलन, शिमला ने जिस त्तात्परता और सक्रियता से इस मुददे को उठाया था वो कबीले तारीफ़ हैं जिसमें युवाओं की विशेष भागीदारी का उल्लेख करना अनिवार्य है I
पारम्परिक खुम्लियाँ एवं जन-जागरण
हाटी आन्दोलन को जन आन्दोलन के रूप में परिवर्तित करने में सबसे बड़ा योगदान हाटी परम्परागत खुम्लियों का रहा I इन खुम्लियों ने लोगों के मध्य नई उर्जा तथा जागृति प्रदान की और सुप्त अवस्था में पड़ा हाटी जनजातीय मुद्दा सम्पूर्ण देश के अन्दर चर्चा का विषय बना I इसने राजनेताओं का ध्यान आकर्षित किया और हाटी संगठनों को हर स्तर पर मजबूती प्रदान की I यह इन महा खुम्लियों का ही चमत्कार था कि धुर राजनितिक विरोधियों को एक मच पर बैठने के लिए बाध्य किया गया I
इन खुम्लियों तथा महाखुम्लियों में नारी शक्ति, छात्र शक्ति तथा युवा शक्ति को शांति पूर्ण आन्दोलन से जोड़ा I इस स्वर्णिम अवसर का लाभ लेते हुए हाटी रणनीतिकारों ने लोगों के मध्य हाटी मुद्दे की सही व सटीक जानकारी प्रस्तुत की और लोक विश्वास अर्जित किया I 29 अप्रैल, 2018 को गुरु की नगरी पांवटा साहिब से हाटी महा खुम्लियों की शुरुआत की गयी I
तत्पश्चात अँधेरी, रोनहाट, शिलाई, नोरी (राजगढ़), संगडाह, कमरऊ, टोरू, तथा श्री रेणुका जी में निरंतर खुम्लियों का दौर चलता रहा और लोक समर्थन बढ़ता चला गया I शान्ति और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए हाटी रणनीतिकारों ने इन खुम्लियों के माध्यम से एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की जब 21 जनवरी तथा 22 दिसंबर 2021 के दिन सम्पूर्ण गिरिपार सिरमौर की 102 पंचायतों ने हाटी समुदाय को जनजाति का संवैधानिक अधिकार दिलाने के समर्थन में एक साथ प्रस्ताव पारित कर देश के माननीय प्रधान मत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय जनजातीय मंत्री श्री अर्जुन मुंडा तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर को भेजें I
उपसंहार एवं निर्णायक कदम
अंत में यह पुनः उल्लेखित करना अत्यंत आवश्यक है कि राष्ट्रीय जनजातीय आयोग वर्ष 1979 पहले ही इस मामलें में अपनी अनुशंसा प्रदान कर चुका था और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के सम्बंधित मंत्री ने वर्ष 2018 में खुले मंच से हाटियों की मांग पूरी करने की घोषणा कर चुके थे I
अपनी कर्मभूमि और माटी के प्रति समर्पित निश्छल भाव से शिलाई विधान सभा से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक श्री बलदेव तोमर ने जिस तत्परता और राजनितिक इच्छा शक्ति के साथ पांच दशकों से मृत प्राय मुद्दे को संजीवनी प्रदान की उसे शब्दों की सीमा में बांधना उचित नहीं होगा I हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का सीधा लाभ इस हाटी मुद्दे को सिरे चढ़ाने के लिए अपने राजनितिक करियर को भी दाव पर लगाया और इसे हर हाल में पूरा करने के लिए कृत संकल्प रहें I
हिमाचल प्रदेश सरकार के जनजातीय विभाग के प्रधान सचिव ने प्रधान मंत्री कार्यालय को 5 जनवरी 2021 के पत्र के प्रति उत्तर में विस्तृत रिपोर्ट 19 अक्तूबर, 2021 को सौंपी जिसे जन-जातीय शोध तथा प्रशिक्षण संस्थान हि० प्र० ने तैयार किया था और प्रदेश सरकार के जन-जातीय विकास विभाग ने “Ethnography of Hattee Community of Trans-Giri Area, District Sirmour, H.P.” के शीर्षक के अंतर्गत प्रेषित किया I
ऐतिहासिक सफलता: विधेयक की यात्रा
मार्च 2022 को हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर जी ने हाटी समिति से विधान सभा के सभागार में विस्तृत चर्चा करने के उपरान्त हाटी मुद्दे को गंभीरता से सिरे चढ़ने के सार्थक प्रयास प्रारम्भ किये I हिमाचल सरकार द्वारा भेजी गयी सभी रिपोर्टों के आधार पर महा पंजीयक भारत सरकार द्वारा 13 अप्रैल को सहमती रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी I
इसी परिपेक्ष्य में मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर की अगुवाई में केंद्रीय हाटी समिति का एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रि श्री अमित शाह से मुलाकात हुई जिसमें केंद्रीय मंत्रि जी ने हाटी की दशकों लंबित मांग को शीघ्र पूरा करने का वादा किया I
14 सितम्बर, 2022 को भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाटी विधेयक लोक सभा में पेश करने हेतु अपनी अनुशंसा प्रदान की I 16 दिसंबर, 2022 को लोक सभा में हाटी अनुसूचित जनजाति (संविधान संशोधन) विधेयक धवनी मत से पारित किया गया I
26 जुलाई, 2023 को राज्य सभा में भी यह विधेयक ध्वनी मत से पारित किया गया I अंतत: 4 अगस्त, 2023 को भारत के महामहीम राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् इसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया और यह हाटी अनुसूचित जनजाति (संवैधानिक संशोधन) अधिनियम के नाम से अभिहित हुआ है I
वर्तमान में हाटी हिमाचल प्रदेश की 11वीं अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित हुई हैं I